फरीदाबाद। हार्डवेयर चौक स्थित इंडियन हार्डवेयर रेजिडेंशियल कॉलोनी में कथित अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर विवाद फिर गरमा गया है। फरीदाबाद निवासी एवं बड़खल निगरानी समिति के पूर्व सदस्य आनंद कांत भाटिया ने नगर निगम आयुक्त, नगर योजनाकार और संबंधित अधिकारियों को सिविल अवमानना की चेतावनी दी है। 28 सितंबर के नोटिस में सात दिन के भीतर कार्रवाई और आयुक्त के अनुमोदन व हस्ताक्षर वाली स्थलवार रिपोर्ट मांगी गई थी। भाटिया के अनुसार, निगम ने इसका जवाब नहीं दिया।
शिकायत के मुताबिक, हरियाणा सरकार ने कर्मचारियों के आवासीय उपयोग के लिए इंडियन हार्डवेयर इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आईएचआई) को 17,562 वर्ग गज जमीन पट्टे पर दी थी। इसमें 4,586 वर्ग गज का हिस्सा कथित तौर पर बेहद कम कीमत पर दिया गया। ₹3.5 लाख प्रति वर्ग गज के बताए गए मौजूदा भाव से पूरे भूखंड की अनुमानित कीमत ₹614.67 करोड़ यानी करीब ₹615 करोड़ और 4,586 वर्ग गज हिस्से की कीमत लगभग ₹161 करोड़ है।
आरोप है कि आईएचआई ने मालिकाना हक मिलने से पहले ही निजी बिल्डरों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) कर जमीन हस्तांतरित करने की प्रतिबद्धता जताई और यह जानकारी सरकार से छिपाकर कर्मचारियों के आवासीय उपयोग के आधार पर तरजीही आवंटन हासिल किया।
वहीं सरकारी हस्तांतरण विलेख 21 जनवरी 2014 को शाम 4:54 बजे पंजीकृत हुआ, जबकि उसी जमीन का आईएचआई का बिक्री विलेख शाम 5:01 बजे, महज सात मिनट बाद, नौ व्यक्तियों के नाम दर्ज हुआ। शिकायत में आरोप है कि इन व्यक्तियों ने आईएचआई निदेशक अजय गुप्ता के लिए बेनामी रूप से जमीन रखी और कई स्तरों पर बिक्री करके वास्तविक लाभार्थियों तथा लेन-देन को छिपाया गया।
बिक्री विलेख की भुगतान सूची में गैर-खरीदारों से ₹2.51 करोड़, ₹98.11 लाख नकद और खरीदारों द्वारा आईएचआई को मालिकाना हक मिलने से पांच दिन पहले हरियाणा सरकार के खजाने में जमा ₹4.785 करोड़ दर्ज होने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता इसे कथित मिलीभगत का प्रमाण बताते हैं। आईएचआई के खातों में वर्ष 2002 की पुनर्बिक्री और नामित व्यक्तियों के नाम जमीन लेने की व्यवस्था का भी उल्लेख है। 21 जनवरी 2014 का विवादित एमओयू शेष जमीन का मालिकाना हक मिलने से पहले उसके भविष्य में हस्तांतरण की प्रतिबद्धता दर्शाता है।
इसी परिसर के दूसरे 3,426 वर्ग गज हिस्से के लिए ₹12 करोड़ से अधिक की रकम सीधे सरकारी खजाने में जमा हुई। इसमें 2014 में ₹3.44 करोड़ और 2023 में अतिरिक्त ₹8.57 करोड़ शामिल हैं।
शिकायत के अनुसार, ₹3.44 करोड़ का भुगतान वित्त वर्ष 2014-15 से 2021-22 तक आईएचआई की लेखा-पुस्तकों और शेयरधारकों के सामने रखे गए खातों में दर्ज नहीं था। आयकर अधिनियम की धारा 148 के तहत नोटिस मिलने के बाद इसे वर्ष 2022-23 के खातों में करीब नौ साल बाद दर्ज किया गया। लेखापरीक्षा टिप्पणियों में कंपनी का यह दावा दर्ज होने की बात कही गई है कि उसे अपने ही नाम पर जमा रकम की जानकारी नहीं थी। इससे भुगतान करने वाले, सौदे पर नियंत्रण रखने वाले और रकम शेयरधारकों से छिपाए जाने को लेकर सवाल उठे हैं।
शिकायतों में अजय गुप्ता, निजी बिल्डरों तथा पुनर्वास विभाग, उप-पंजीयक कार्यालय और नगर निगम के अधिकारियों पर सरकारी जमीन कम कीमत पर हासिल करने की कथित साजिश, मिलीभगत से मुकदमे दायर करने, अवैध भू-विभाजन और व्यावसायिक दोहन के आरोप हैं। यह भी आरोप है कि दिल्ली उच्च न्यायालय के वर्ष 2008 से लागू कंपनी की अचल संपत्तियां बेचने पर रोक संबंधी आदेश के बावजूद सौदे किए गए। शिकायतकर्ता के मुताबिक, कई स्तरों पर हस्तांतरण से शेयरधारकों को नुकसान पहुंचा और अंतिम खरीदार भी विवादों में फंस गए।
2014 से 2018 तक जांच और तोड़फोड़ की कार्रवाई
यह मामला पहले भी सुर्खियों में रहा है। द ट्रिब्यून ने 31 दिसंबर 2014 को बताया था कि मुख्यमंत्री कार्यालय ने आईएचआई की जमीन की रजिस्ट्रियों की विजिलेंस ब्यूरो से जांच कराने का आदेश दिया था। उपायुक्त की रिपोर्ट के हवाले से उसी दिन आगे बिक्री, स्वीकृत नक्शों के विपरीत निर्माण, एक भवन निरीक्षक के निलंबन और एक SDO के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का उल्लेख किया गया था।
नगर निगम ने 7 मई 2015 को 4,586 वर्ग गज हिस्से की भू-विभाजन अनुमति रद्द कर दी थी। आदेश में आईएचआई निदेशक के रूप में गुप्ता के आवेदन में महत्वपूर्ण तथ्यों की गलतबयानी और धोखापूर्ण कथन का उल्लेख था। वर्ष 2017 में उच्च न्यायालय ने अनुमति रद्द करने का फैसला बरकरार रखते हुए दर्ज किया कि यह अंतिम हो चुका था।
कुछ समाचार पत्रों ने दिसंबर 2017 में तोड़फोड़ की कार्रवाई रोके जाने को लेकर विवाद की खबर प्रकाशित की थी। उनकी 19 जुलाई 2018 की रिपोर्ट के अनुसार, स्वीकृत नक्शे और भू-उपयोग की अनुमति न होने के कारण नगर निगम ने 26 फरवरी 2018 को वहां छह दुकानें गिराई थीं।
इसके बावजूद मौजूदा शिकायतों में निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियां जारी रहने का आरोप है। भाटिया ने 18 सितंबर 2026 को दुकानों, कार्यालयों, गोदामों और अलग-अलग प्रॉपर्टी आईडी के संबंध में फिर शिकायत की थी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर कार्रवाई की मांग
भाटिया ने लोगनाथन बनाम तमिलनाडु राज्य मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का हवाला दिया है। 20 मई 2026 को अदालत ने नगर निगम फरीदाबाद को नोटिस जारी करने का आदेश दिया था। 22 सितंबर के संशोधित आदेश में केवल आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित और अनुमत क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधि मिलने पर पहले कदम के रूप में परिसर सील करने तथा पूरी तरह अनधिकृत ढांचों पर कानून के अनुसार शीघ्र सीलिंग या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने का निर्देश है।
इन्हीं निर्देशों के आधार पर भाटिया ने स्थल निरीक्षण, अनधिकृत व्यावसायिक परिसरों की सीलिंग और पूरी तरह अवैध ढांचों को गिराने की मांग की है। उन्होंने जानबूझकर आदेशों का पालन नहीं करने पर सिविल अवमानना की कार्यवाही की चेतावनी दी है। 6 अक्टूबर को उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त न्यायमित्र एवं नोडल अधिकारी, वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा से भी तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
भाटिया ने प्रधानमंत्री कार्यालय से भूमि मामले की जांच कराने, हरियाणा सरकार के खजाने को हुए नुकसान का आकलन करने और कथित रकम के हेरफेर, कई स्तरों पर हस्तांतरण तथा बेनामी संपत्तियों की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय को निर्देश देने की मांग भी की है।
